Friday 2 November 2012

जैविक खाद बनाकर एक लाख रूपए हर माह कमा रही हैं महिलाएं

छत्तीसगढ़ की महिलाएं स्वसहायता समूह के माध्यम से नित नई सफलता की इबारत लिख रही हैं। प्रदेश की महिलाएं छोटे-छोटे स्वसहायता समूह बनाकर घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक मोर्चे पर भी फतह हासिल कर रही हैं। प्रदेश का कृषि विभाग जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चला रही है। विभाग के इस काम में राज्य की महिला स्वसहायता समूह भी अपना योगदान दे रही हैं। दुर्ग जिले के ग्राम नगपुरा के जय सतनाम महिला स्वसहायता समूह की महिलाएं स्थानीय बाजारों में बिक्री के लिए जैविक खाद तैयार कर रही हैं। इस समूह की महिलाएं केंचुआ खाद का उत्पादन कर प्रति माह एक लाख रूपए कमा रही हैं। समूह की महिलाएं कृषि विभाग द्वारा लगाई जाने वाली प्रदर्शनियों में अन्य महिलाओं को इसका प्रशिक्षण भी देती हैं। इनकी सफलता से प्रभावित होकर भिलाई इस्पात संयंत्र ने इन्हें अपने गोद लिए हुए गांवों में केंचुआ खाद बनाने के प्रशिक्षण का कार्य भी सौंपा है।

कमजोर माली हालत वाले जय सतनाम महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने करीब दशक भर पहले अपने गांव की श्रीमती नीता गायकवाड़ के नेतृत्व में 12 महिलाओं का समूह बनाकर नगपुरा के ग्रामीण बैंक में 30 रूपए प्रति सदस्य की दर से पूंजी एकत्र करना शुरू किया। इन महिलाओं की लगन और संगठन भावना से प्रभावित होकर कृषि विभाग के अधिकारियों ने वर्ष 2004 में इनके लिए कृषि प्रक्षेत्र रूआबांधा (दुर्ग) में केंचुआ खाद उत्पादन संबंधी प्रशिक्षण की व्यवस्था की। कृषि विभाग के अनुदान से इन महिलाओं ने केंचुआ खाद के दो टांकों का निर्माण कर इसका उत्पादन प्रारंभ किया। विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में इन महिलाओं के बनाए खाद की बिक्री की व्यवस्था की गई।

छत्तीसगढ़ शासन के नवा अंजोर योजना से समूह को बड़ी मदद मिली। इस योजना के तहत जय सतनाम महिला स्वसहायता समूह ने वर्ष 2008 में 50,000 रूपए का अनुदान प्राप्त कर केंचुआ खाद के छह नए टांकों का निर्माण कर अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाई। इन महिलाओं के कार्य को देखकर कृषि विभाग ने वर्ष 2010 में समूह की सचिव श्रीमती गौरीबाई टंडन और सदस्य श्रीमती तीजन महंते को अतिरिक्त टांकों के निर्माण के लिए 12,000 रूपए की मदद मुहैया कराई। वर्तमान में समूह के पास खाद उत्पादन के लिए दस टांके हैं। प्रति टांका 30 क्विंटल के हिसाब से समूह हर महीने 300 क्विंटल खाद का उत्पादन कर रहा है। पांच रूपए प्रति किलो की दर से खाद बेचने पर महिलाओं को हर महीने डेढ़ लाख रूपए मिलते हैं। 300 क्विंटल खाद उत्पादन की लागत 50,000 रूपए आती है। इस तरह समूह की महिलाएं हर महीने एक लाख रूपया का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।

जय सतनाम महिला स्वसहायता समूह द्वारा बनाए गए खाद की बिक्री दुर्ग-भिलाई के बाजारों में आसानी से हो रही है। सही और जल्दी तौल के लिए महिलाओं ने इलेक्ट्रॉनिक तौलाई मशीन भी खरीद ली है। समूह की महिलाएं बचत के रूप में बैंक में अब हर महीने सौ रूपए जमा कर रही हैं। केंचुआ खाद के उत्पादन से हो रही आमदनी इन महिलाओं की अतिरिक्त कमाई है। बाकी समय में ये महिलाएं कृषि संबंधी अन्य कार्य भी करती हैं। स्वावलंबन के दम पर समूह की महिलाएं अपने घरों की माली हालत सुधार रही हैं। जय सतनाम महिला स्वसहायता समूह के कार्य प्रदेश की अन्य महिला स्वसहायता समूहों के लिए अनुकरणीय और प्रेरणादाई है।  

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